रामपुर: दो पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत, सेशन कोर्ट ने किया बरी; फिलहाल जेल में ही रहेंगे

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रामपुर(अरमान खान): चर्चित दो पासपोर्ट मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत मिली है। रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को उनकी अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में उन्हें बरी करते हुए जमानत भी मंजूर कर ली है। हालांकि, दो पैन कार्ड मामले में सजा होने के कारण वे फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। दोनों पिता-पुत्र इन दिनों जेल में बंद हैं।

क्या था मामला?

यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज कराया गया था। रामपुर के भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने जालसाजी कर दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए थे। मामले की जांच के बाद पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।

निचली अदालत ने सुनाई थी सजा

इस मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट (निचली अदालत) में चली थी। अदालत ने 5 दिसंबर 2025 को फैसला सुनाते हुए अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराया था और उन्हें सात साल की कैद के साथ 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

सेशन कोर्ट ने बदला फैसला

निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ बचाव पक्ष की ओर से एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में क्रिमिनल अपील दाखिल की गई थी। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने भी सजा बढ़ाने की मांग करते हुए अपील दायर की थी। दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

शुक्रवार को एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट के न्यायाधीश विजय कुमार ने अपना फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया और अब्दुल्ला आजम को इस मामले में बरी कर दिया।

अधिवक्ता का बयान

अब्दुल्ला आजम के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने बताया, “निचली अदालत ने सात साल की सजा का जो आदेश पारित किया था, उसके खिलाफ हमने विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट में अपील दाखिल की थी। न्यायालय ने हमारी अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया है।”

उन्होंने आगे कहा कि हर मामला अपने अलग तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होता है। उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और आगे भी न्याय मिलने की उम्मीद है।

जेल में ही क्यों रहेंगे अब्दुल्ला?

भले ही दो पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला आजम बरी हो गए हों, लेकिन दो अलग-अलग पैन कार्ड रखने के एक अन्य मामले में उन्हें निचली अदालत से सात साल की सजा मिल चुकी है। इसी सजा के चलते वे फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। फैसले के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अदालत परिसर के बाहर कड़ी सुरक्षा तैनात की गई थी।

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