कमिश्नर आंजनेय कुमार की प्रेरणा से बदली सरकारी स्कूल की तस्वीर: गतिविधि आधारित शिक्षण से गणित मजबूत कर रहे बच्चे

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मुरादाबाद: सरकारी स्कूलों के कायाकल्प और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए मुरादाबाद के मंडल आयुक्त (कमिश्नर) आंजनेय कुमार सिंह द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयास और उनकी दूरगामी सोच अब धरातल पर रंग लाने लगी है। उनके विशेष मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि कुंदरकी ब्लॉक का जूनियर हाईस्कूल मिलक सिखड़ी आज जिले के लिए एक मिसाल बन चुका है। कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह की प्रेरणा से यहां शिक्षा को रोचक और व्यावहारिक बनाने की अनूठी पहल शुरू की गई है, जहाँ बच्चों को ‘लर्निंग बाय डूइंग’ (करके सीखना) पद्धति से आगे बढ़ाया जा रहा है।

कमिश्नर की सोच का असर: बढ़ा अभिभावकों का भरोसा

मंडल आयुक्त आंजनेय कुमार सिंह हमेशा से सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर देते रहे हैं। उनकी इसी कार्यशैली का असर है कि विद्यालय की बेहतर शिक्षण पद्धति को देखकर आसपास के क्षेत्रों में सरकारी व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ा है। स्कूल में जहाँ पहले छात्र संख्या महज 100 तक सिमटी थी, वहीं कमिश्नर साहब के प्रयासों और शिक्षकों की मेहनत से अब यह बढ़कर 160 तक पहुंच गई है। स्थिति यह है कि अब अपने गांव के अलावा पड़ोसी गांव हात्सा नगला के अभिभावक भी निजी स्कूलों को छोड़ अपने बच्चों को इस सरकारी स्कूल में भेजने लगे हैं।

झाड़ू की सीक और क्विज बॉक्स से मजबूत हो रहा गणित

प्रधानाध्यापक इंचार्ज रेनू बाला के निर्देशन में मंडल आयुक्त के विजन को आगे बढ़ाते हुए विद्यालय के शिक्षक बच्चों को गतिविधियों के माध्यम से सिखा रहे हैं। गणित शिक्षक राजेश त्यागी बच्चों को झाड़ू की सीकों और विशेष मॉडलों के माध्यम से जोड़, घटाव और अन्य कठिन गणितीय क्रियाएं चुटकियों में सिखा रहे हैं। कमिश्नर की मंशानुसार बच्चों में तार्किक क्षमता विकसित करने के लिए स्कूल में ‘क्विज बॉक्स’ का उपयोग किया जा रहा है। बच्चे पूरे उत्साह के साथ सवालों के जवाब दे रहे हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और बौद्धिक क्षमता दोनों मजबूत हो रहे हैं।

पढ़ाई के साथ कंप्यूटर ज्ञान और पाक कला की अनूठी शिक्षा

कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह के तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के संकल्प के तहत विद्यालय में ‘सार्ट एनजीओ’ के माध्यम से बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा दी जा रही है ताकि ग्रामीण परिवेश के बच्चे भी तकनीकी रूप से सशक्त हो सकें। इसके अलावा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ पाक कला (कुकिंग) का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। मिड-डे मील के समय शिक्षक बच्चों को भोजन बनाना और सलाद तैयार करने जैसी व्यावहारिक चीजें सिखाते हैं।

सीमित संसाधनों में कमिश्नर के ‘नवाचार’ से बदला रूप

विद्यालय में महज पांच कक्ष हैं, जिनमें से एक कार्यालय और एक को लैब बनाया गया है, जबकि तीन कमरों में कक्षाएं चलती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद, कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह की मॉनिटरिंग और प्रोत्साहन के चलते इंचार्ज रेनू बाला, गणित शिक्षक राजेश त्यागी और विज्ञान शिक्षिका अल्पना अग्रवाल पूरी लगन से बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं।

यह स्कूल आज यह साबित कर रहा है कि यदि प्रशासनिक नेतृत्व में आंजनेय कुमार सिंह जैसा दृढ़ संकल्प और विजन हो, तो सरकारी स्कूलों की तस्वीर और तकदीर दोनों को बदला जा सकता है।

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