वाशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आधिकारिक हेलीकॉप्टर ‘मरीन वन’ (Marine One) की सुरक्षा में एक बड़ी चूक का मामला सामने आया है। वॉशिंगटन स्थित रीगन नेशनल एयरपोर्ट (DCA) से उड़ान भर रहे एक कमर्शियल पैसेंजर जेट के बेहद करीब मरीन वन के पहुंचने से हड़कंप मच गया।
फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने इस घटना को ‘लॉस ऑफ सेपरेशन’ (Loss of Separation) करार दिया है और नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) के साथ मिलकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
4 अगस्त को हुई इस घटना में राष्ट्रपति ट्रंप को ले जा रहे मरीन वन और एनवॉय एयर (Envoy Air) की फ्लाइट 3742 के बीच हवा में तय सुरक्षा दूरी कम हो गई थी।
उड्डयन नियमों के मुताबिक, दो विमानों के बीच हवा में कम से कम 1.5 मील की क्षैतिज (horizontal) और 500 फीट की लंबवत (vertical) दूरी होना अनिवार्य है।
हालाँकि, FAA और व्हाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि दोनों विमान आमने-सामने टकराने के रास्ते पर नहीं थे। पूरी प्रक्रिया के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) दोनों चालकों से संपर्क में था, इसलिए राष्ट्रपति ट्रंप को कोई सीधा खतरा पैदा नहीं हुआ।
सुरक्षा प्रोटोकॉल में कहाँ हुई चूक?
जनवरी 2025 में वॉशिंगटन में एक आर्मी ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर और यात्री विमान के बीच हुई टक्कर में 67 लोगों की मौत हो गई थी। उस दर्दनाक हादसे के बाद अमेरिकी एयर स्पेस में सुरक्षा नियमों को काफी सख्त कर दिया गया था।
नए सुरक्षा नियमों के तहत, जब भी राष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर रीगन एयरपोर्ट के आसपास के हवाई क्षेत्र में होता है, तब एयर ट्रैफिक कंट्रोल को अन्य सभी कमर्शियल उड़ानों का टेक-ऑफ रोक देना होता है।
शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि ATC के स्तर पर निर्देश देने में गलती हुई, जिससे मरीन वन की मौजूदगी के बावजूद कमर्शियल जेट को रनवे से उड़ान भरने की अनुमति दे दी गई।
जांच के आदेश
FAA ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष ‘सेफ्टी रिव्यू टीम’ का गठन किया है। यह टीम जांच कर रही है कि कड़े सुरक्षा नियम लागू होने के बाद भी एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम और कम्युनिकेशंस के स्तर पर यह इंसानी गलती कैसे हुई।
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