बदायूं सांसद आदित्य यादव ने रेल मंत्री को लिखा पत्र; बबराला-अनूपशहर रेलवे फाटक पर ROB निर्माण की मांग

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बदायूं सांसद आदित्य यादव

बदायूं/गुन्नौर(सालिम रियाज़): बदायूं लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री आदित्य यादव ने क्षेत्र की एक प्रमुख यातायात समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है। सांसद ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक विस्तृत पत्र लिखकर बबराला-अनूपशहर मुख्य मार्ग पर स्थित रेलवे फाटक संख्या 58/बी पर रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के निर्माण की पुरजोर मांग की है।

letter for rob

भीषण जाम से जनता को मिलेगी निजात

सांसद आदित्य यादव ने अपने पत्र में अवगत कराया कि गुन्नौर विधानसभा के अंतर्गत आने वाला यह मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा है। यहाँ स्थित रेलवे फाटक के कारण प्रतिदिन हजारों नागरिकों, विद्यार्थियों, किसानों और व्यापारियों को घंटों भीषण जाम का सामना करना पड़ता है।

जाम की मुख्य वजहें और प्रभाव:

  • ट्रेनों की अधिकता: इस ट्रैक से रोजाना लगभग 25 से 30 सवारी और मालगाड़ियाँ गुजरती हैं, जिससे फाटक बार-बार और लंबे समय के लिए बंद रहता है।
  • आपातकालीन सेवाओं में बाधा: जाम के कारण अक्सर एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ फंस जाती हैं, जिससे गंभीर मरीजों की जान पर बन आती है।
  • आर्थिक नुकसान: घंटों जाम में फंसे रहने से ईंधन की बर्बादी और समय की भारी हानि होती है।

भविष्य की चुनौतियों पर ध्यान

सांसद ने दूरगामी सोच रखते हुए रेल मंत्री का ध्यान अलीगढ़-बरेली डबल लाइन रेलवे परियोजना की ओर भी खींचा। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद ट्रेनों की संख्या में और इजाफा होगा, जिससे फाटक पर जाम की स्थिति और भी भयावह हो सकती है। अतः भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अभी से ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण अनिवार्य है।

सांसद का बयान

“जनहित हमारी प्राथमिकता है। बबराला-अनूपशहर मार्ग पर ओवरब्रिज बनने से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। हमने रेल मंत्री जी से आग्रह किया है कि इस परियोजना के लिए प्रशासनिक और तकनीकी कार्यवाही जल्द से जल्द शुरू की जाए ताकि गुन्नौर और आसपास के ग्रामीणों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।” — आदित्य यादव, सांसद (बदायूं)

क्षेत्रीय विकास को मिलेगी गति

स्थानीय लोगों ने सांसद के इस प्रयास की सराहना की है। ओवरब्रिज बनने से क्षेत्र में व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवागमन निर्बाध और सुरक्षित हो सकेगा। अब गेंद रेल मंत्रालय के पाले में है कि वह इस महत्वपूर्ण जनहित की मांग पर कितनी जल्दी अमल करता है।