रामपुर में मुलायम सिंह यादव की पुण्यतिथि पर आज़म खान ने भावुक होकर पुराने रिश्तों को याद किया। उन्होंने सरकार और व्यवस्थाओं पर तंज कसे, साथ ही अखिलेश यादव की राजनीतिक जिम्मेदारी और विरासत को लेकर अहम बातें कहीं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट यहाँ…
रामपुर: आज़म खान ने शुक्रवार को एक भावुक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को याद करते हुए कई निजी और राजनीतिक दर्द साझा किए। मुलायम सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित इस सभा में जब वह नेताजी को याद कर रहे थे, उनकी आंखें नम हो गईं।
मुलायम सिंह के लिए भावुक हुए
आज़म खान ने कहा कि उनका और मुलायम सिंह का रिश्ता ऐसा था कि सदियों तक लोग उसका जिक्र करेंगे। उन्होंने बताया कि नेताजी की राजनीति में सम्मान और सहनशीलता की मिसाल शायद ही कहीं देखने को मिले। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा,
“जनता दरबार में उन पर चाकू से हमला हुआ था, लेकिन उन्होंने न पुलिस को बुलाया और न ही मीडिया को। बल्कि जिसने हमला किया था, उसे बुलाकर माफ कर दिया।”
निजी संघर्ष और बेबसी का दर्द
कार्यक्रम में आज़म खान ने अपने हालात का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वे अपना “शादी घर” बेचना चाहते हैं लेकिन लोग डर की वजह से खरीदने से कतरा रहे हैं, क्योंकि “सरकार और इंतजामिया वाले उन्हें मुसीबत में डाल देंगे“। उन्होंने कहा, “हम तो जहर भी खरीदने जाएं तो वह भी नहीं मिलेगा।”
उन्होंने किराये पर ली गई इमारत का जिक्र करते हुए बताया कि मालिक को भी उनकी वजह से नुकसान हुआ और किराये पर कोई दफ्तर देने को तैयार नहीं हुआ।
अखिलेश यादव और राजनीतिक विरासत
मुलायम सिंह के बाद की राजनीति पर बोलते हुए आज़म खान ने कहा कि आज नई दिशा तय करने की जरूरत है। उन्होंने अखिलेश यादव और नेताजी की राजनीतिक विरासत पर जोर देते हुए कहा, “यह जिम्मेदारी न केवल उनकी औलाद, बल्कि उनके राजनीतिक उत्तराधिकारियों की भी है कि इस विरासत को समाज पर खर्च करें, सिर्फ पैसा नहीं बल्कि वक्त भी दें।”
मुलायम सिंह के आदर्श और आज की राजनीति
आज़म खान ने कहा कि मुलायम सिंह विरोधियों के प्रति भी सम्मान रखते थे और बेवजह दुश्मनी नहीं करते थे, जबकि आज के दौर में राजनीतिक विरोधियों के साथ कटुता और बदले की भावना हावी है।
उन्होंने कहा, “अगर किसी के खानदान में 50 वोट हैं तो नेताजी उनकी उतनी ही इज्जत करते थे, भले ही पांच वोट हों तो भी उस परिवार को उतनी ही इज्जत करते थे। यही आदर्श सरकारें बनाता था।”
जनता और सम्मान की राजनीति
अपने संबोधन को समाप्त करते हुए आज़म खान ने कहा कि राजनीति में सफलता तभी आएगी जब हम उन लोगों को सम्मान दें जो इसके हकदार हैं, न कि केवल नारेबाजी और उछलकूद करने वालों को। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज को बदलने के लिए फिदाई यानी सच्चे समर्पित लोगों की जरूरत है।
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