वरिष्ठ पत्रकार अज़ीज़ बर्नी ने खुलासा किया है कि कभी समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आज़म ख़ान ने कांग्रेस में जाने का मन भी बनाया था। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
सीनियर पत्रकार अज़ीज़ बर्नी ने सोशल मीडिया पर एक लेख लिखा है जिससे यह बात सामने आई है कि कभी आज़म ख़ान ने कांग्रेस पार्टी में जाने का मन भी बनाया था। बर्नी ने आज़म ख़ान की रिहाई पर लिखे अपने लेख में कहा है कि लंबे सियासी सफ़र के बावजूद आज़म ख़ान ने दोस्त कम और दुश्मन ज़्यादा बनाए। उन्होंने समाजवादी पार्टी और अपने रिश्तों को लेकर कई अहम परतें खोलीं।
आज़म ख़ान और सियासी सफ़र
आज़म ख़ान समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से रहे और मुलायम सिंह यादव के बेहद क़रीबी सहयोगियों में गिने जाते हैं। बर्नी ने याद किया कि मुलायम सिंह कभी ख़ुद आज़म ख़ान को मनाने उनके घर जाने को तैयार हो जाते थे। यह उनकी पार्टी और राजनीति में आज़म के क़द को दिखाता है।
कांग्रेस जाने का ज़िक्र
बर्नी ने खुलासा किया कि जब जया प्रदा और अमर सिंह के साथ मुलायम सिंह यादव की नज़दीकियां बढ़ीं तो आज़म ख़ान उनसे नाराज़ हुए और उन्होंने कांग्रेस पार्टी में जाने का मन बनाया। हालांकि, उस समय वे मुलायम से पूरी तरह अलग नहीं हुए, जबकि बाद में कल्याण सिंह जैसे बाबरी मस्जिद विध्वंस से जुड़े नेता के समाजवादी पार्टी में आने पर भी उन्होंने चुप्पी साध ली।
मुस्लिम नेताओं से दूरियां
बर्नी के मुताबिक, आज़म ख़ान कभी भी समाजवादी पार्टी के अधिकांश मुस्लिम नेताओं से अच्छे रिश्ते नहीं रख पाए। उनकी रिहाई के बाद पार्टी सांसद एस.टी. हसन के बयान — “दिल नहीं करता कि उनसे मिलने जाऊं” — इस दूरी को साफ़ दर्शाते हैं।
अखिलेश यादव से टकराव
बर्नी ने यह भी लिखा कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के समय से ही आज़म ख़ान और उनके बीच टकराव रहा, जिसका असर पूरे कार्यकाल में दिखा।
इतिहास में दो यादें
आज़म ख़ान को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी खड़ी करने के लिए तो याद किया जाएगा ही, साथ ही उन्हें बाबरी मस्जिद विध्वंस से जुड़े नेताओं के साथ एक ही पार्टी में रहने के लिए भी इतिहास याद रखेगा।
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