नेपाल, फ्रांस के बाद अब इंग्लैंड में बवाल: लंदन में टॉमी रॉबिन्सन की रैली पर हिंसा, पुलिस से झड़प में दर्जनों घायल

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नेपाल और फ्रांस में राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के बाद, शनिवार, 13 सितंबर को इंग्लैंड की राजधानी लंदन में भी बड़ी हिंसा देखने को मिली। टॉमी रॉबिन्सन द्वारा आयोजित ‘यूनाइट द किंगडम’ मार्च में एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए, लेकिन रैली हिंसक हो गई जब रॉबिन्सन समर्थकों का एक समूह पुलिस और विरोध प्रदर्शनकारियों से भिड़ गया। पुलिसकर्मियों पर बोतलें फेंकी गईं, कई घायल हुए और 25 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया।

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नेपाल में युवा आंदोलनकारियों ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और राजशाही की वापसी के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन किया था, जबकि फ्रांस में आपत्तिजनक कानूनों और आर्थिक नीतियों के विरोध में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शनों की खबरें आई थीं। इंग्लैंड की यह रैली भी इसी खतरनाक राजनीतिक माहौल की एक कड़ी के रूप में देखी जा रही है।

लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने बताया कि 26 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें से चार की हालत गंभीर है। असिस्टेंट कमिश्नर मैट ट्विस्ट ने कहा कि कई लोग शांतिपूर्ण थे, लेकिन बड़ी संख्या में वे भी थे जो हिंसा फैलाने आए थे। काउंटर-प्रोटेस्टर्स ने “शरणार्थियों का स्वागत है” और “फार-राइट को खत्म करो” जैसे नारे लगाए।

रैली में टॉमी रॉबिन्सन के समर्थकों ने “स्टॉप द बोट्स”, “सेन्ड देम होम” और “वी वांट आवर कंट्री बैक” जैसे नारे लगाये। अमेरिकी दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट चार्ली किर्क की भी याद की गई। फ्रांस के फार-राइट नेता एरिक ज़ेमूर और एलन मस्क ने भी इस संदर्भ में अपने बयान दिए।

यह घटनाक्रम यूरोप और हिमालय क्षेत्र में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक संघर्ष को उजागर करता है।

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