दिल्ली छात्र आंदोलन: कथित पुलिस बर्बरता के खिलाफ NHRC पहुंची NFYM, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

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नई दिल्ली | 23 जुलाई: नेशनल फेडरेशन ऑफ यूथ मूवमेंट (NFYM) ने हाल ही में दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन (पार्लियामेंट मार्च) के दौरान कथित पुलिस बर्बरता और मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज कराई है। संगठन ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है।

गंभीर आरोप: ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग’

NHRC को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने असीमित और असंगत बल का प्रयोग किया।

शिकायत में निम्नलिखित मुख्य बिंदु शामिल हैं:

  • पैलेट गन और इलेक्ट्रोशॉक बैटन का कथित इस्तेमाल।
  • अत्यधिक लाठीचार्ज, अवैध हिरासत और शारीरिक उत्पीड़न।
  • महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार।

पत्रकारों, डॉक्टरों और अभिभावकों के साथ भी बदसलूकी का दावा

NFYM ने आयोग को अवगत कराया है कि कार्रवाई का असर केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा। आंदोलन को कवर कर रहे पत्रकारों, छात्रों का साथ दे रहे शिक्षकों, स्थल पर पहुंचे अभिभावकों और घायलों को आपातकालीन चिकित्सा दे रहे डॉक्टरों व मेडिकल वॉलंटियर्स के साथ भी मारपीट, धमकी और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं।

बिना नेम-प्लेट पुलिसकर्मी और सादे कपड़ों में संदिग्ध

फेडरेशन ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के दौरान कई पुलिसकर्मी बिना नेम-प्लेट या पहचान बैज के मौजूद थे। इसके अलावा, पुलिस बल के साथ कुछ लोग सादे कपड़ों में भी देखे गए। NFYM ने मांग की है कि जवाबदेही तय करने के लिए इस पहलू की भी गहन जांच की जाए।

साक्ष्य सुरक्षित रखने और कार्रवाई की मांग

संगठन ने मानवाधिकार आयोग से निम्नलिखित कदम उठाने की अपील की है:

  1. साक्ष्य सुरक्षा: घटना से संबंधित सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, मेडिकल रिकॉर्ड्स और मोबाइल वीडियो को तुरंत सुरक्षित किया जाए।
  2. बयान दर्ज करना: घायल छात्रों, पत्रकारों, डॉक्टरों, प्रत्यक्षदर्शियों और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों के आधिकारिक बयान दर्ज किए जाएं।
  3. कार्रवाई व मुआवजा: दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई हो, पीड़ितों को उचित मुआवजा और चिकित्सा मिले।
  4. दिशा-निर्देश: भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी हों।

“शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र की आधारशिला है”

“शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और स्वतंत्र पत्रकारिता भारतीय लोकतंत्र के मूल आधार हैं। डॉक्टरों और शिक्षकों का छात्रों के साथ खड़े होना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। मानवाधिकार उल्लंघन के इन गंभीर आरोपों की पारदर्शी जांच और दोषियों की जवाबदेही तय होना कानून के शासन के लिए अनिवार्य है।”

मसीहुज़्ज़मा अंसारी, चेयरमैन, NFYM

NFYM ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) इस मामले पर त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रभावितों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

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