अमरोहा/नई दिल्ली: अमरोहा के पूर्व सांसद कुँवर दानिश अली ने हाल ही में ईरान के सर्वोच्च लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। दानिश अली ने अपने संदेश में उनके जीवन और संघर्ष को मानवता के लिए एक बड़ी मिसाल बताया।
संघर्ष को बताया ‘इबादत’
दानिश अली ने अपने बयान में कहा कि अयातुल्लाह अयातुल्लाह खामेनेई ने दुनिया को यह सिखाया कि अपने हक के लिए लड़ना केवल सियासत (राजनीति) नहीं, बल्कि एक इबादत है। उन्होंने कहा:
“अलविदा, अयातुल्लाह! आपने दुनिया को बता दिया कि अपने हक़ की लड़ाई सियासत नहीं, इबादत है। आप एक ऐसी मिसाल हैं जिसने दिखाया कि ज़िल्लत के महलों से बेहतर स्वाभिमान की ज़िंदगी है।”
भारत के सच्चे मित्र
पूर्व सांसद ने उन्हें अदम्य साहस का प्रतीक बताते हुए कहा कि वे उस हौसले का नाम हैं जो हर तूफान के बाद फिर से खड़ा होने की ताकत रखता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के परिप्रेक्ष्य में यह भी जोड़ा कि उनकी शहादत से भारत ने अपना एक सच्चा और विश्वसनीय दोस्त खो दिया है।
अमरोहा के पूर्व सांसद का यह संदेश सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें उन्होंने दिवंगत आत्मा के प्रति गहरा सम्मान प्रकट किया है।
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