हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह में ‘जश्ने-चिराग़’: रूहानियत और मोहब्बत की रौशनी से नहायेगी धनतेरस की शाम

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दिल्ली: दिल्ली की तारीख़ी हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह पर आज धनतेरस की मुक़द्दस शाम को रूहानियत और मोहब्बत का एक हसीन मंज़र सजने जा रहा है। जैसे-जैसे शाम ढलेगी, दरगाह परिसर ‘जश्ने-चिराग़’ की रोशनी में जगमगा उठेगा, जहां अक़ीदतमंद चिराग़ रौशन करेंगे और सूफ़ी संगीत की मस्त धुनों पर वज्द में झूम उठेंगे।

इस मौके पर होने वाली क़व्वाली की रात सूफ़ियाना पैग़ाम और तहज़ीबी सौहार्द की मिसाल बनेगी। दरगाह का यह सालाना आयोजन न सिर्फ़ दिल्ली की गंगा-जमनी तहज़ीब की झलक दिखाता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि इंसानियत और मोहब्बत ही इस मुल्क की असली पहचान हैं।

देश-विदेश से आए अहले-क़लम और संवाददाता इस दरगाही शब में एकत्र होकर सूफ़ी फ़लसफ़े, इत्तेहाद और अमन के पैग़ाम पर गुफ़्तगू करेंगे।आयोजन का मक़सद यही है कि नफ़रत की जगह मोहब्बत का दीया जलाया जाए और इंसानियत के पुल मज़बूत किए जाएँ।

धनतेरस की इस रूहानी शाम में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह एक बार फिर हिन्दुस्तान की इत्तेहाद की रौशन मिसाल बनेगी।