देहरादून: राहुल गांधी का युवाओं से संवाद, कहा– “देश के नौजवानों के साथ हो रहा है 4 तरह का अन्याय”

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Rahul Gandhi Kota Student Dialogue
देश की शिक्षा प्रणाली 'एक्सटोर्शन मशीन', बच्चों को दबाती और कुचलती है; इसे बदलना होगा: राहुल गांधी

देहरादून: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देहरादून में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत युवाओं और छात्रों के साथ एक विशेष संवाद किया। इस दौरान देश के युवाओं की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज का नौजवान चार गंभीर अन्यायों से जूझ रहा है।

सरकारी नौकरी का दबाव और सीमित अवसर

संवाद के दौरान राहुल गांधी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का गणित समझाते हुए कहा:

  • सफलता की दर: देश में इस समय करीब 9 करोड़ ‘एस्पिरेंट्स’ (प्रतियोगी छात्र) हैं, जिनमें से केवल 6 लाख युवाओं को सफलता मिल पाती है। इसका सीधा मतलब है कि हर 150 में से सिर्फ 1 युवा ही सफल हो पाता है।
  • आर्थिक और मानसिक बोझ: हर साल देश के करोड़ों बच्चे अपनी सामान्य जिंदगी छोड़कर 5 साल तक परीक्षाओं की तैयारी में खप जाते हैं। इन 5 सालों में एक छात्र पर करीब 9 लाख रुपये का खर्च आता है, जिसे उनका परिवार अपनी जमापूंजी दांव पर लगाकर या कर्ज लेकर जुटाता है।

राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा, “हिंदुस्तान के करोड़ों युवाओं को इस मुश्किल रास्ते पर इसलिए चलना पड़ रहा है क्योंकि उनके सामने बाकी सारे दरवाजे बंद कर दिए गए हैं और सिर्फ सरकारी नौकरी का ही एक दरवाजा खुला रखा गया है।”

ईमानदारी बनाम भ्रष्टाचार का सिस्टम

देश की परीक्षा प्रणाली पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज छात्रों के सामने दो रास्ते बन चुके हैं:

  1. पहला रास्ता: पूरी तरह ईमानदारी का है।
  2. दूसरा रास्ता: भ्रष्टाचार और पेपर लीक का है।

“देश के 99% स्टूडेंट्स पूरी तरह ईमानदार हैं और वे कभी भी भ्रष्टाचार के रास्ते पर नहीं चलना चाहते। लेकिन महज 1% लोग सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार के रास्ते पर चलते हैं, जिससे बाकी के 99% मेहनती और ईमानदार छात्रों का भविष्य बर्बाद हो जाता है।” — राहुल गांधी

“छात्रों की आवाज संसद तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी” — पवन खेड़ा

इसी कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी मीडिया से बात की। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के उद्देश्य को साफ करते हुए उन्होंने कहा: “छात्रों की आवाज को सुनना और उसे संसद तक मजबूती से पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। हम यहाँ छात्रों को कुछ सुनाने नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं को गहराई से सुनने और समझने आए हैं।”