ग्रामीण भारत के लिए ‘गेम चेंजर’ बनेगा नया कानून: रामपुर में सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर का बड़ा बयान

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रामपुर,11 जनवरी, 2026: उत्तर प्रदेश के सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में सरकार के संकल्प को दोहराया। रामपुर के ‘संत शिरोमणि दास गेस्ट हाउस’ में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में उन्होंने ‘विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025’ को ग्रामीण विकास के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ करार दिया।

125 दिन के रोज़गार की गारंटी: अब गाँव में ही मिलेगा सम्मान

मंत्री राठौर ने अधिनियम की बारीकियों को साझा करते हुए कहा कि यह कानून केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाएगा। उन्होंने इस मिशन की तीन सबसे बड़ी ताकतों को रेखांकित किया:

  • गारंटीकृत कार्य दिवस: अब हर पात्र ग्रामीण परिवार को वर्ष में कम से कम 125 दिनों का सुनिश्चित रोजगार मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
  • काम नहीं तो भत्ता: पारदर्शिता और जवाबदेही तय करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में काम नहीं दिया गया, तो सरकार बेरोजगारी भत्ता प्रदान करेगी। यह प्रावधान ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा करेगा।
  • पंचायतों का ‘पावर हाउस’ बनना: अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतों को और अधिक शक्तियाँ दी गई हैं, ताकि वे स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं और रोजगार का बेहतर प्रबंधन कर सकें।

“यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि ग्रामीण पलायन को रोकने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का महा-अभियान है।”जेपीएस राठौर, सहकारिता मंत्री

पलायन पर लगेगी लगाम, बढ़ेगा स्वरोजगार

प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी और स्थानीय नेता भी उपस्थित रहे। मंत्री ने विश्वास जताया कि इस मिशन के प्रभावी होने से शहरों की ओर होने वाला पलायन रुकेगा और ग्रामीण युवा अपने ही क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसरों से जुड़ सकेंगे। उन्होंने इसे ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ बताया।

विशेषताविवरण
नया कानूनआजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025
रोज़गार गारंटीन्यूनतम 125 दिन प्रति वर्ष
सुरक्षा कवचकाम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान
मुख्य लक्ष्यपलायन रोकना और ग्रामीण सशक्तिकरण

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