मैनपुरी: जिस बेटे पर पिता की हड्डी तोड़ने का आरोप, रियलिटी चेक में कहानी निकली कुछ और

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मैनपुरी(सिराज हुसैन): 80 वर्षीय वीरेंद्र सिंह के साथ मारपीट, पैर तोड़ने और कमरे में बंद रखने के सनसनीखेज आरोपों का सच कुछ और ही निकला। मीडिया की टीम जब ग्राउंड जीरो (खरपरी) पहुंची और रियलिटी चेक किया, तो सामने आई हकीकत ने पूरे मामले का रुख ही मोड़ दिया।

जमीन बेची, नौकरियां छोड़ीं: पारिवारिक पृष्ठभूमि आई सामने

परिवार के अनुसार, वीरेंद्र सिंह किसी जमाने में सैकड़ों बीघा जमीन के मालिक थे, जिसे उन्होंने धीरे-धीरे बेच दिया। यही नहीं, उन्होंने कई नौकरियां भी छोड़ दीं और लंबे समय तक घर से दूर दोस्तों के साथ रहे। परिजनों ने स्पष्ट किया कि उनके पैर में चोट हाल ही में बहन के घर जाने के दौरान लगी थी, न कि किसी मारपीट में।

धोखे से नहीं, खरीदकर कराया बैनामा

मकान हड़पने के आरोपों को खारिज करते हुए परिजनों ने बताया कि प्लॉटिंग के तहत राजपाल सिंह ने अपनी कमाई से यह जमीन खरीदी थी और नियमानुसार अपने बेटे दीपक के नाम बैनामा कराया था। इसमें किसी भी तरह के छल-कपट का सवाल ही नहीं उठता।

बेटा मजदूरी में लाचार, पिता के पास थे पैसे

आर्थिक स्थिति का सच बताते हुए परिजनों ने कहा कि आरोपी ठहराए गए बेटे राजपाल खुद मजदूरी करके किसी तरह परिवार का पेट पाल रहे हैं। दूसरी ओर, पिता वीरेंद्र सिंह के पास जमीन बेचकर आई एक बड़ी रकम मौजूद थी।

सवालों के घेरे में आरोप

फिलहाल वीरेंद्र सिंह की बेटी उन्हें इलाज के लिए नोएडा ले गई हैं। हालांकि, पड़ोसियों के बयान, मौके पर मिले सबूतों और परिजनों के पक्ष ने बुजुर्ग और उनकी बेटी द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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