जामिया मिल्लिया इस्लामिया के रजिस्ट्रार, प्रो. रिज़वी, लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय, नेपाल में विजिटिंग प्रोफेसर नियुक्त

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नई दिल्ली, 2 सितंबर, 2025: जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के लिए यह गर्व और सम्मान की बात है कि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी को नेपाल स्थित लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय के साउथ एशिया सेंटर फॉर पीस रिसर्च एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट में विजिटिंग प्रोफेसर नियुक्त किया गया है। यह केंद्र वैश्विक स्तर पर शांति निर्माण, कूटनीति, क्षेत्रीय सहयोग और सतत विकास से जुड़े शोध को प्रोत्साहित करने के लिए समर्पित है।

इस नई भूमिका को स्वीकार करते हुए प्रो. रिज़वी ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि वे शांति निर्माण, क्षेत्रीय सहयोग, कूटनीति और सतत विकास को आगे बढ़ाने के अवसर के लिए आभारी हैं।

प्रो. रिज़वी एक प्रतिष्ठित शिक्षक, विद्वान और प्रशासक हैं, जिनके पास 20 से अधिक वर्षों का शिक्षण और शोध अनुभव है। उन्होंने 12 मार्च 2025 को पाँच वर्षों की अवधि के लिए जेएमआई के नियमित रजिस्ट्रार का कार्यभार संभाला। इससे पूर्व वे विश्वविद्यालय के नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रिजोल्यूशन के निदेशक रहे हैं।

अपने करियर के दौरान वे अनेक प्रमुख सरकारी संस्थानों और थिंक टैंकों, विशेष रूप से नई दिल्ली स्थित रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (आईडीएसए) से जुड़े रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंध, विदेश नीति और सुरक्षा अध्ययन उनके विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं। उनके शोध का केंद्र ईरान और उसका परमाणु कार्यक्रम, पश्चिम एशिया एवं उत्तरी अफ्रीका में संघर्ष और शांति, दक्षिण एशिया-पश्चिम एशिया के बीच सहयोग और ईरान-चीन संबंधों पर रहा है।

वर्तमान में वे अप्रैल 2022 से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) कोर्ट के विजिटर नॉमिनी हैं और मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय (हैदराबाद) के इंस्टिट्यूशनल अकेडमिक इंटीग्रिटी पैनल के बाहरी सदस्य के रूप में भी जुड़े हैं। इसके अतिरिक्त, वे जेएमआई के कई विभागों और केंद्रों की शैक्षणिक इकाइयों में भी सक्रिय हैं।

एएमयू से राजनीति विज्ञान (अंतरराष्ट्रीय संबंध) में पीएचडी हासिल करने वाले प्रो. रिज़वी ने नेहरू मेमोरियल म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी (तीन मूर्ति भवन, नई दिल्ली) की प्रतिष्ठित डॉक्टोरल फैलोशिप भी प्राप्त की है।

एक प्रखर अकादमिक के रूप में उन्हें देश-विदेश में विद्वानों द्वारा उनके योगदान के लिए व्यापक मान्यता और सराहना मिली है।

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