तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच ईरान से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपना इस्तीफा ईरान के सर्वोच्च नेता मोजताबा खामेनेई को सौंप दिया है।
हालांकि, इस खबर के सामने आते ही ईरान सरकार की ओर से भी तुरंत प्रतिक्रिया आई है और उन्होंने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले के पीछे की मुख्य वजह क्या बताई जा रही है और ईरानी सरकार का इस पर क्या कहना है।
इस्तीफा देने की क्या है कथित वजह?
लंदन स्थित ईरान-विरोधी मीडिया आउटलेट ‘इरान इंटरनेशनल’ और कई अंतरराष्ट्रीय खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति पेजेशकियन देश की शक्तिशाली सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बढ़ते दखल से बेहद नाराज थे।
कथित इस्तीफा पत्र के अनुसार, पेजेशकियन ने निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए हैं:
- फैसलों से किया गया दरकिनार: अमेरिका और इजरायल के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच, देश के सभी बड़े और रणनीतिक फैसलों से राष्ट्रपति और उनके प्रशासन को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया है।
- IRGC का कब्जा: सरकार के काम-काज और देश के आंतरिक मामलों पर पूरी तरह से IRGC के कमांडरों ने नियंत्रण कर लिया है।
- काम करने में असमर्थता: पेजेशकियन ने पत्र में लिखा है कि इन हालातों में वे सरकार चलाने और अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने में असमर्थ हैं, इसलिए वे पद छोड़ना चाहते हैं।
ईरान सरकार ने दावों को बताया ‘अफ़वाह’ और ‘मनगढ़ंत’
जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर आग की तरह फैली, ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय ने तुरंत मोर्चा संभाला। सरकार ने इन सभी खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
राष्ट्रपति कार्यालय के संचार उप-प्रमुख (Deputy of Communications) सैयद मेहदी तबातबाई ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा:
“राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के इस्तीफे की खबरें पूरी तरह से झूठ, मनगढ़ंत और विदेशी विरोधी मीडिया का एक प्रोपेगैंडा हैं। राष्ट्रपति देश और जनता की सेवा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। ईरान की एकता और संप्रभुता को कमजोर करने की ऐसी कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी।”
क्या है मौजूदा स्थिति?
फिलहाल ईरान के राजनीतिक गलियारों में भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ जहाँ स्वतंत्र और विदेशी मीडिया इसे ईरान के अंदरूनी सत्ता संघर्ष (राष्ट्रपति बनाम सेना) का नतीजा बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरानी प्रशासन इसे देश को अस्थिर करने की साजिश करार दे रहा है।
अब देखना यह होगा कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजताबा खामेनेई इस पर कोई सार्वजनिक बयान देते हैं या नहीं, क्योंकि ईरान के कानून के मुताबिक राष्ट्रपति का इस्तीफा सर्वोच्च नेता की मंजूरी के बाद ही प्रभावी होता है।
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