मुरादाबाद: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) के राष्ट्रीय संयोजक मज़ाहिर रुहेला पठान ने अपने गुरु और मंच के मुख्य मार्गदर्शक डॉ. इन्द्रेश कुमार के विचारों को याद करते हुए भारत के राष्ट्र-निर्माण और सुरक्षा में मुस्लिम समुदाय के अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डाला।
“मुसलमान किरायेदार नहीं, वतन के मालिक हैं”
मज़ाहिर रुहेला ने डॉ. इन्द्रेश कुमार के प्रसिद्ध बयान को दोहराते हुए कहा कि “भारत में रहने वाला मुसलमान कोई किरायेदार नहीं है, बल्कि इस मुल्क का मूल नागरिक और मालिक है।” उन्होंने कहा कि देश की मिट्टी में मुसलमानों का पसीना और खून दोनों शामिल हैं। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक, हर ऐतिहासिक मोड़ पर मुस्लिम समुदाय ने कंधे से कंधा मिलाकर अपना योगदान दिया है।
कलाम की वैज्ञानिक क्रांति और आजादी का संघर्ष
रुहेला ने देश के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा:
“भारत को एक शक्तिशाली न्यूक्लियर स्टेट और मिसाइल शक्ति बनाने में सबसे बड़ा योगदान एक मुस्लिम सपूत भारत रत्न डॉ. कलाम का ही है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि मुसलमानों ने इस मुल्क की तरक्की और सुरक्षा के लिए क्या कुछ किया है।”
उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में हजारों मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी और आज का भारत उनके बलिदानों का भी ऋणी है।
कारगिल के मुस्लिम शहीदों को किया नमन
कारगिल युद्ध (1999) का जिक्र करते हुए मज़ाहिर रुहेला ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा में भी मुस्लिम जवानों ने अपनी शहादत देकर वतन परस्ती की मिसाल कायम की है। उन्होंने युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले मुस्लिम जांबाजों को याद किया:
- कैप्टन हनीफ़ उद्दीन (वीर चक्र): जिन्होंने मात्र 24 वर्ष की उम्र में कारगिल के तुरतुक सेक्टर की बर्फीली चोटियों पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपना बलिदान दिया। सेना ने उनकी स्मृति में उस सब-सेक्टर का नाम ‘हनीफ़ सब-सेक्टर’ रखा।
- ग्रेनडियर मोहम्मद असलम: जिन्होंने महार रेजिमेंट की ओर से लड़ते हुए पाकिस्तान घुसपैठियों के छक्के छुड़ाए और वीरगति प्राप्त की।
- नायक सरवर खान: जिन्होंने 18 गढ़वाल राइफल्स के साथ द्रास और बटालिक क्षेत्र में अदम्य साहस का परिचय दिया।
- हवलदार अब्दुल करीम: जिन्होंने जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री (JAK LI) के अग्रिम मोर्चे पर अपनी टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी।
राष्ट्रीय सौहार्द और एकजुटता का संदेश
मज़ाहिर रुहेला ने अपने बयान के अंत में कहा कि गुरु पूर्णिमा का यह पर्व हमें अपने गुरुओं के बताए सत्य और राष्ट्रीय एकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भारत की विविध संस्कृति और अखंडता ही इसकी असली ताकत है, और कोई भी ताकत देश के नागरिकों के इस अटूट रिश्ते को कमजोर नहीं कर सकती।
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