जंतर-मंतर पर गूंजी 14 साल की अलीज़ा की आवाज़: ‘लड़ाई शख्स से नहीं, उस निज़ाम से है जो मेहनत को मायूस करता है’

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नई दिल्ली: देश की राजधानी का ऐतिहासिक जंतर-मंतर एक बार फिर युवाओं और छात्रों के हक की बुलंद आवाज़ का गवाह बना। लेकिन इस बार महफ़िल लूटी रामपुर के फैसल खान लाला की महज़ 14 वर्षीय बेटी अलीज़ा ने, जिसने पेपर लीक के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन में शामिल होकर इतिहास रच दिया। अपनी कम उम्र के बावजूद, अलीज़ा ने एक बेहद ज़िम्मेदार नागरिक की तरह मंच संभाला और लाखों पीड़ित छात्रों के मुस्तक़बिल (भविष्य) और इंसाफ़ के लिए बेबाक़ी से अपनी बात रखी।

व्यवस्था पर सीधा प्रहार: “मेहनत मायूस और बेईमानी कामयाब क्यों?”

आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए अलीज़ा की आवाज़ में वो परिपक्वता और दर्द था, जिसने वहाँ मौजूद हर शख्स को झकझोर कर रख दिया। अलीज़ा ने व्यवस्था पर सीधा हमला बोलते हुए कहा:

“हमारी लड़ाई किसी शख्स या चेहरे से नहीं है, बल्कि हमारी लड़ाई उस पूरे निज़ाम (सिस्टम) से है जहाँ दिन-रात मेहनत करने वाला छात्र मायूस खड़ा रहता है और बेईमानी करने वाला कामयाब नज़र आता है।”

अलीज़ा की यह आवाज़ सिर्फ़ एक बेटी का बयान नहीं, बल्कि देश के उन लाखों मेहनती छात्रों की सामूहिक चीख बनकर गूंजी, जिनके सुनहरे ख़्वाब बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाओं की भेंट चढ़कर टूट जाते हैं।

​ईमानदार भविष्य की उम्मीद

रामपुर की इस बेटी के जज़्बे को देखकर वहाँ मौजूद हर नागरिक भावुक और प्रेरित नज़र आया। आज देश का हर अभिभावक और छात्र यही दुआ कर रहा है कि हमारे बच्चों को एक ऐसा निज़ाम मिले, जहाँ उनकी किस्मत का फ़ैसला किसी भ्रष्टाचार या पेपर लीक से नहीं, बल्कि उनकी खुद की ईमानदारी और कड़ी मेहनत से हो। अलीज़ा ने यह साबित कर दिया है कि हक की आवाज़ उठाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि बुलंद हौसले की ज़रूरत होती है।

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