जच्चा-बच्चा केंद्रों पर प्रशासन का बड़ा शिकंजा; कार्रवाई की भनक लगते ही लगे ताले, विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल।
बदायूँ (सहसवान): उत्तर प्रदेश के बदायूँ ज़िले के सहसवान नगर और ग्रामीण इलाकों में बिना पंजीकरण और मानकों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से चल रहे कथित जच्चा-बच्चा केंद्रों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा अभियान छेड़ा है। लेकिन इस छापेमारी के दौरान जो नजारा देखने को मिला, उसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
टीम को देखते ही मची अफरा-तफरी, बंद मिले अस्पताल
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ACMO) के नेतृत्व में जैसे ही स्वास्थ्य विभाग की टीम सहसवान क्षेत्र में पहुंची, अवैध अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया। छापेमारी की भनक लगते ही अधिकांश जच्चा-बच्चा केंद्रों के संचालक आनन-फानन में अपने अस्पतालों के शटर गिराकर और ताले जड़कर मौके से रफूचक्कर हो गए।
जब स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए चिन्हित केंद्रों पर पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था और केवल बंद शटर दिखाई दिए।
जनता का सवाल: ‘अगर सब वैध था, तो भागे क्यों?’
अस्पतालों के इस तरह अचानक बंद होने से उनकी वैधता और कामकाज के तरीकों पर बड़े सवालिया निशान लग गए हैं। स्थानीय निवासियों का गुस्सा इस बात को लेकर फूटा है कि आखिर डर किस बात का था?
- जान जोखिम में: स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि ये केंद्र बिना किसी वैध लाइसेंस, बिना प्रशिक्षित डॉक्टरों और बिना जरूरी मेडिकल उपकरणों के भगवान भरोसे चल रहे हैं।
- मरीजों से खिलवाड़: इन कथित अस्पतालों में आने वाली गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की जान के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
- मिलीभगत की आशंका: छापेमारी के दौरान लगभग सभी अस्पतालों का एक साथ बंद मिलना इस बात का साफ संकेत है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध स्वास्थ्य सेवाओं का यह काला कारोबार फल-फूल रहा था।
मिलीभगत के घेरे में स्वास्थ्य विभाग!
इस पूरी कार्रवाई के बाद अब जनता के मन में स्वास्थ्य विभाग को लेकर भी तीखे सवाल उठ रहे हैं:
- क्या इतने बड़े पैमाने पर बिना मानकों के चल रहे इन जच्चा-बच्चा केंद्रों की जानकारी विभाग को पहले से नहीं थी?
- अगर विभाग को इसकी भनक थी, तो इतने समय तक इन पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
- क्या छापेमारी की सूचना पहले ही लीक हो गई थी, जिससे संचालकों को भागने का मौका मिल गया?
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इन बंद मिले अस्पतालों के खिलाफ क्या सख्त कानूनी कदम उठाता है, या फिर यह छापेमारी महज एक कागजी औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
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