लखनऊ/ब्यूरो रिपोर्ट: समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर की गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। पार्टी की एक अहम बैठक के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में वरिष्ठ नेता कमाल अख्तर और मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम का एक लिखित ब्योरा ग्लोबलटुडे को मिला है, जिसमें बैठक के भीतर हुई एक-एक बात का सिलसिलेवार जिक्र है।
बैठक में खुशनूद के प्रवेश पर मचा बवाल
सामने आए विवरण के मुताबिक, बैठक के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने अपनी बात रखते हुए कमाल अख्तर ने वहां मौजूद ‘खुशनूद’ नाम के एक युवक की उपस्थिति पर कड़ा ऐतराज जताया। कमाल अख्तर ने कहा:
“जावेद अली सांसद हैं, मैडम (रुचि वीरा) भी सांसद हैं, मैं विधायक हूँ, जयवीर जिला अध्यक्ष हैं… लेकिन ये खुशनूद बैठा है, ये कौन है? इसका यहाँ क्या मतलब है?”
इस पर रुचि वीरा ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वह (खुशनूद) उनके साथ आया है। इस पर कमाल अख्तर ने तंज कसते हुए कहा, “हमारे साथ भी बाहर बहुत लोग हैं, उन्हें भी बुला लो।”
अखिलेश यादव ने पूछा- “तुम कहाँ के हो?”
माहौल गरमाता देख खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने खुशनूद से सीधे सवाल किया, “तुम कहाँ के हो?” इस पर युवक ने जवाब दिया कि वह बिजनौर का रहने वाला है। अखिलेश यादव ने तुरंत कहा, “तो जब बिजनौर वालों को बुलाएँगे, तब बोलना।”
इस बीच रुचि वीरा ने युवक का बचाव करते हुए उसे शांत रहने को कहा और कहा, “तुम चुप जाओ, खुशनूद… मैं बताती हूँ।”
“चपरासी को सलाम करना पड़े, यह नहीं हो सकता”
बहस यहीं नहीं रुकी। कमाल अख्तर ने रुचि वीरा पर निशाना साधते हुए कहा, “मैडम ठीक हैं, हम उनका सम्मान करते हैं, लेकिन इनके चपरासी (खुशनूद) को सलाम करना पड़े, यह नहीं हो सकता।”
कमाल अख्तर ने रुचि वीरा पर पार्टी के अन्य नेताओं को नजरअंदाज करने का बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि मैडम अपनी होर्डिंग्स पर किसी विधायक का फोटो नहीं लगाती हैं। उन्होंने कहा, “यह जब भी अपने प्रोग्राम में किसी को बुलाती हैं, तो कोई इन्हें क्यों बुलाएगा? इन्होंने मुशायरा कराया तो किसी विधायक को नहीं बुलाया, यहाँ तक कि आज़म खान साहब का जन्मदिन मनाया गया, तब भी नहीं बुलाया। तो दूसरों से क्यों उम्मीद करती हैं?”

“आखिर मैं ही क्यों निशाने पर हूँ?”
लिखित शिकायत/विवरण के दूसरे हिस्से में खुशनूद या इस पूरे मामले से जुड़े व्यक्ति का पक्ष भी सामने आता है, जिसमें कहा गया है: “आखिर मैं ही क्यों निशाने पर हूँ? विधायक नवाब जान इनका (रुचि वीरा का) फोटो नहीं लगाते, विधायक नासिर नहीं लगाते, पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन नहीं लगाते, पूर्व विधायक यूसुफ नहीं लगाते और उनके लोग नेता भी नहीं मानते… तो उनसे तो कुछ नहीं कहा। ये मेरे पीछे पड़ी हैं। मैं 2 साल से इन्हें फोन नहीं करता, न ये मुझे करती हैं। हमारा कहीं आमना-सामना भी नहीं हुआ, तो मैं निशाने पर क्यों हूँ?”
विवरण में रुचि वीरा पर गंभीर आरोप लगाते हुए आगे कहा गया है कि मैडम जिले में अपना वर्चस्व चाहती हैं, जो हो नहीं सकता। वह दबाव बनाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहती हैं। यह पीडीए (PDA) प्रोग्राम मेरे क्षेत्र में हुआ भी नहीं था, मैं सिर्फ एक आयोजक था, लेकिन मैडम मेरे खिलाफ साजिश कर रही हैं।
हिंदू-मुस्लिम कार्ड और धर्मनिरपेक्षता पर सवाल
विवाद यहीं नहीं थमा, बैठक में धार्मिक ध्रुवीकरण की बात भी उठी। रुचि वीरा ने कथित तौर पर कहा कि “मैं हिंदू हूँ”, जिस पर पलटवार करते हुए कमाल ने कहा कि 11 लाख मुस्लिम आबादी वाली सीट पर मुसलमानों ने ही उन्हें वोट देकर सांसद बनाया है, तब वह हिंदू नहीं थीं। यह मुरादाबाद की सेकुलर सोच को दर्शाता है। यह भी आरोप लगाया गया कि रुचि वीरा उन क्षेत्रों में जाती हैं जहाँ के विधायकों ने उनका चुनाव भी नहीं लड़वाया और वह हर स्तर पर विधायकों के खिलाफ विधानसभा टिकट बांटने का काम करती हैं।
अखिलेश यादव ने दिए जांच के आदेश
बैठक में बढ़ते हंगामे को देखते हुए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मामले को शांत कराने का प्रयास किया। उन्होंने नेताओं को आश्वासन देते हुए कहा, “मैं इस पूरे मामले की जांच कराता हूँ, इसके बाद जो भी कसूरवार पाया जाएगा, उसे सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा”।
इस घटनाक्रम के बाद मुरादाबाद और आस-पास के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है और यह साफ हो गया है कि सपा के भीतर स्थानीय स्तर पर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
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