सहसवान की राजनीति का एक युग समाप्त: पूर्व कैबिनेट मंत्री व 5 बार के विधायक ओमकार सिंह यादव का निधन

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शोक की लहर: गुरुवार शाम दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन, पैतृक गाँव सिंघोला ले जाया गया पार्थिव शरीर। अखिलेश सरकार में रहे थे कैबिनेट मंत्री।

सहसवान (बदायूँ): सहसवान विधानसभा क्षेत्र से पाँच बार विधायक रहे वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमकार सिंह यादव का गुरुवार को हार्ट अटैक (दिल का दौरा) पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही बदायूँ सहित पूरे उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है।

अचानक बिगड़ी तबीयत, डॉक्टरों ने घोषित किया मृत

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, गुरुवार शाम करीब 4 बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। परिजन उन्हें तुरंत सहसवान के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहाँ डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन के बाद परिजन पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गाँव (संभल जनपद की गुन्नौर तहसील के ग्राम सिंघोला) ले गए हैं, जहाँ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

तीन दशकों तक रहा सहसवान की राजनीति में वर्चस्व

ओमकार सिंह यादव का राजनीतिक सफर बेहद शानदार और जन-सरोकारों से जुड़ा रहा। उन्होंने लगभग तीन दशकों तक सहसवान की राजनीति पर अमिट छाप छोड़ी:

  • पहली जीत (1991): उन्होंने वर्ष 1991 में जनता दल के टिकट पर पहली बार सहसवान विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी।
  • 5 बार विधायक: क्षेत्र की जनता ने उन पर बार-बार भरोसा जताया और वे कुल पाँच बार विधायक चुने गए।
  • कैबिनेट मंत्री: अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार में उन्होंने उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री के रूप में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
  • विरासत: वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उनके पुत्र बृजेश यादव ने सहसवान सीट से चुनाव जीतकर पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया और पहली बार विधायक बने।

“सहज व्यवहार और जनसंपर्क ही उनकी असली ताकत थी। ओमकार सिंह यादव का निधन सहसवान ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”

समर्थकों और नेताओं का लगा ताँता

ओमकार सिंह यादव अपने मिलनसार स्वभाव, मजबूत जनसंपर्क और क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय थे। उनके निधन का समाचार मिलते ही उनके आवास पर समर्थकों, शुभचिंतकों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का जुटना शुरू हो गया।

विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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