जब कुछ पशु या पक्षी उनके वास्तविक रंग के विपरीत दिखाई दें तो यह नज़ारा ज़रूर अद्भुत हो जाता है।
उत्तर प्रदेश/रामपुर(रिज़वान ख़ान): यह दुनिया अजीबो ग़रीब प्राणियों से भारी पड़ी है। लेकिन जब कुछ पशु या पक्षी उनके वास्तविक रंग के विपरीत दिखाई दें तो यह नज़ारा ज़रूर अद्भुत हो जाता है। अगर बात की जाए कौवे की तो हमारे देश में यह काले या स्लेटी रंग के पाए जाते हैं। हालांकि यह बात अलग है लाखों में से एक आद सफ़ेद कौआ भी कभी कबार कहीं ना कहीं अपनी मौजूदगी को दर्ज कराता नजर आ ही जाता है। मगर यहां बात हो रही है चितकबरे(सफेद और काला) रंग के अद्भुत कौवे की जो उत्तर प्रदेश के रामपुर में दिखाई दिया है।
जनपद रामपुर के अंबेडकर पार्क के निकट पेड़ और दीवारों पर उठता बैठता एक ऐसा अद्भुत कौवा दिखाई दिया जो अपने आप में कुछ खास ही नजर आता है।
दरअसल हमारे देश में अमूमन काले और स्लेटी रंग के अलग-अलग कौवे ही मौजूद हैं। वहीं दूसरी ओर इक्का दुक्का सफेद कौवे देखे जाने की चर्चाएं भी आमजन में होती रहती हैं। लेकिन रामपुर में देखा गया एक कौवा अपने आप में अद्भुत ही नजर आता है जिसका कुछ हिस्सा काले और बड़ा हिस्सा सफेद रंग का है।
कौवे का काला होना
शास्त्रों के मुताबिक कौवा माता धूमावती देवी का वाहन है और श्राद्ध के समय काले कौवा को प्रसाद ग्रहण करने की मान्यता वर्षों से चली आ रही है।

दूसरी ओर पौराणिक कथा के मुताबिक एक साधु ने कौवे को अमृत खोजने का काम सौंपा तो इस दौरान कौवे को अमृत प्राप्त हो गया और इसके बाद उसने उस अमृत को ग्रहण कर लिया था। बस इसी बात से साधु नाराज हो गए और उन्होंने कौवे को पकड़ कर अपने कमंडल में डुबो दिया जिसके बाद कौए का रंग काला हो गया।
वैज्ञानिक तथ्य
वहीं वैज्ञानिक तथ्यों की बात की जाए तो अनुवांशिक दोष के कारण कोई कोई कौवा सफेद रंग का हो जाता है। मगर इसके पीछे एक बड़ा लॉजिक यह है की सफेद कौवे लाखों में एक होते हैं।
डीएफओ राजीव कुमार के मुताबिक हजारो या लाखों कौवो मे से जेनेटिक लक्षण के चलते कुछ इस तरह के कौए हो जाते हैं। फिलहाल यह दो रंग के कौवे से जुडी और अथिक जानकारियां जुटाई जा रही हैं। वहीँ इस तरह का कौवा होना अपने आप में एक दुर्लभ घटना है।
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