साहित्यकार कृष्ण लाल नारंग ‘साक़ी’ के निधन पर शोकसभा, उर्दू जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली, 11 जून: उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन की ओर से प्रसिद्ध साहित्यकार एवं उर्दू प्रेमी कृष्ण लाल नारंग ‘साक़ी’ के निधन पर दरियागंज स्थित ‘उर्दू बुक रिव्यू’ कार्यालय में एक शोकसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान साहित्य जगत की प्रमुख हस्तियों ने उनके निधन को उर्दू साहित्य के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।

उर्दू के सच्चे संरक्षक थे नारंग ‘साक़ी’

शोकसभा को संबोधित करते हुए ‘उर्दू बुक रिव्यू’ के संपादक मोहम्मद आरिफ़ इक़बाल ने कहा:

“के. एल. नारंग ‘साक़ी’ उर्दू के सच्चे प्रेमी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन उर्दू भाषा, साहित्य तथा इसके रचनाकारों की सेवा में समर्पित कर दिया। वृद्धावस्था और शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद भी उर्दू से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता और जोश देखने लायक होता था।”

उन्होंने आगे बताया कि नारंग साक़ी के भारत और पाकिस्तान के कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों एवं शायरों से बेहद घनिष्ठ संबंध थे। डॉ. सैफ़ी सरवनजी द्वारा संपादित उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘मशाहीर के ख़ुतूत: नारंग साक़ी के नाम’ इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

सरहदों पार तक प्रसिद्ध थी मेहमाननवाज़ी

उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद ख़ान ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उर्दू जगत में नारंग ‘साक़ी’ जैसा उदार और समर्पित व्यक्तित्व बहुत दुर्लभ है। वे साहित्यकारों और शायरों की बेमिसाल मेहमाननवाज़ी के लिए जाने जाते थे। भारत और पाकिस्तान के अनगिनत नामचीन कवियों और लेखकों ने उनके आतिथ्य का आनंद लिया था।

पुरस्कारों और कृतियों के जरिए रहेंगे अमर

डॉ. ख़ान ने जानकारी दी कि कृष्ण लाल नारंग ‘साक़ी’ की साहित्यिक सेवाओं के सम्मान में पिछले वर्ष 9 नवंबर को ‘विश्व उर्दू दिवस’ के अवसर पर उन्हें प्रतिष्ठित ‘कुँवर महेंद्र सिंह बेदी विश्व उर्दू दिवस पुरस्कार’ से नवाजा गया था। वे न केवल एक लेखक थे, बल्कि जीवनभर विभिन्न उर्दू पत्र-पत्रिकाओं को आर्थिक सहयोग और संरक्षण भी प्रदान करते रहे।

उनकी लिखी पुस्तकें आज भी पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • ‘अदीबों के लतीफ़े’
  • ‘ख़ुश कलामियाँ क़लमकारों की’

शोकसभा के अंत में वक्ताओं ने सर्वसम्मति से कहा कि उर्दू भाषा और साहित्य के उत्थान के लिए दी गई उनकी ऐतिहासिक सेवाओं को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

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