अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुस्लिम देशों से ‘अब्राहम समझौते’ में शामिल होने का आह्वान

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US expels South African ambassador
डोनाल्ड ट्रम्प, अमेरिकी राष्ट्रपति, फ़ाइल फ़ोटो

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, पाकिस्तान, कतर, मिस्र और जॉर्डन सहित कई प्रमुख मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने और ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) में शामिल होने का आग्रह किया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए अब्राहम समझौते के दायरे को बढ़ाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि वे इस संबंध में कई मुस्लिम देशों के शीर्ष नेताओं और प्रमुखों के संपर्क में हैं।

प्रमुख नेताओं से बातचीत का दावा

डोनाल्ड ट्रम्प के अनुसार, उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल को आगे बढ़ाने के लिए कई वैश्विक नेताओं से बातचीत की है। इन नेताओं में शामिल हैं:

  • मोहम्मद बिन सलमान (सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस)
  • जनरल सैयद आसिम मुनीर (पाकिस्तान के सेना प्रमुख)
  • रेसेप तैयप एर्दोगन (तुर्की के राष्ट्रपति)
  • किंग अब्दुल्ला द्वितीय (जॉर्डन के राजा)

ईरान के साथ समझौते पर भी नजर

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी साझा किया कि ईरान के साथ बातचीत में सकारात्मक प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर तेहरान (ईरान) के साथ कोई समझौता हो जाता है, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ा ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है। अपने कड़े रुख को दोहराते हुए ट्रंप ने कहा, “या तो यह अब तक का सबसे अच्छा समझौता होगा, या फिर कोई समझौता नहीं होगा।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान के साथ राजनयिक बात नहीं बनती है, तो क्षेत्र में तनाव और गहरा सकता है। यही वजह है कि अमेरिका इस समय तत्काल कूटनीतिक उपायों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ट्रंप ने अपने प्रतिनिधियों को इस संबंध में राजनयिक संपर्कों को तुरंत तेज करने के निर्देश दिए हैं।

क्या है अब्राहम समझौता?

अब्राहम समझौते की शुरुआत 2020 में डोनाल्ड ट्रम्प के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान हुई थी। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंधों को पूरी तरह सामान्य कर लिया था। ट्रंप का मानना है कि इसमें और मुस्लिम देशों के जुड़ने से मध्य पूर्व में एक नए राजनयिक युग की शुरुआत होगी।