ब्रिटेन में चिकित्सा जगत का चमत्कार: मृत महिला के गर्भाशय दान से जन्मा पहला बच्चा

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ब्रिटेन में चिकित्सा विज्ञान ने एक नया इतिहास रच दिया है। ग्रेस बेल नाम की एक महिला, जो जन्म से ही गर्भाशय (Uterus) न होने की बीमारी से जूझ रही थीं, उन्होंने एक मृत महिला द्वारा दान किए गए गर्भाशय के जरिए एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। यह ब्रिटेन में अपनी तरह का पहला और यूरोप का तीसरा ऐसा सफल मामला है।

क्या है MRKH सिंड्रोम? (Mayer-Rokitansky-Küster-Hauser)

ग्रेस बेल को 16 साल की उम्र में पता चला था कि वह MRKH सिंड्रोम से पीड़ित हैं। यह स्थिति दुनिया भर में हर 5,000 में से एक महिला को प्रभावित करती है।

  • इसमें महिलाएं बिना गर्भाशय के पैदा होती हैं।
  • हालांकि, उनके अंडाशय (Ovaries) सामान्य रूप से काम करते हैं।
  • डॉक्टरों ने ग्रेस को बताया था कि वह कभी मां नहीं बन पाएंगी, लेकिन इस सफल प्रत्यारोपण ने उनकी दुनिया बदल दी।

सर्जरी से जन्म तक का सफर

यह प्रक्रिया किसी चमत्कार से कम नहीं थी। ग्रेस बेल की प्रत्यारोपण सर्जरी सात घंटे तक चली।

  1. सफलता: सर्जरी के बाद दवाओं और हार्मोन के जरिए उनका मासिक धर्म (Periods) शुरू हुआ।
  2. गर्भधारण: प्राकृतिक गर्भधारण के बजाय, बेल ने IVF (In-Vitro Fertilization) का सहारा लिया।
  3. जन्म: दिसंबर 2025 में पश्चिम लंदन के एक अस्पताल में ह्यूगो का जन्म हुआ, जिसका वजन लगभग 7 पाउंड था।

“मेरा बेटा ह्यूगो एक चमत्कार है।” — ग्रेस बेल

ब्रिटेन में अंग दान और भविष्य की राह

गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में ही ब्रिटेन में एक महिला ने अपनी जीवित बहन के गर्भाशय से बच्चे को जन्म दिया था। ग्रेस बेल का मामला इसलिए अलग है क्योंकि इसमें मृत डोनर का उपयोग किया गया।

आगे क्या होगा? डॉक्टरों के अनुसार, यदि ग्रेस भविष्य में एक और बच्चा चाहती हैं, तो ठीक है, अन्यथा इस प्रत्यारोपित गर्भाशय को शरीर से हटा दिया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि मरीज को जीवन भर इम्यूनोसप्रेसेन्ट (Immuno-suppressant) दवाएं न लेनी पड़ें, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकती हैं।

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