हालाइट्स:
- बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया।
- अप्रैल 2023 में पद संभालने वाले शहाबुद्दीन का कार्यकाल अप्रैल 2028 तक चलना था।
- पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से गुप्त फोन कॉल की रिपोर्ट्स के बाद से ही उन पर दबाव की चर्चाएं थीं।
ढाका (न्यूज डेस्क): बांग्लादेश में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संसद के स्पीकर ने उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है।
शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में बांग्लादेश के राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 तक था, लेकिन उन्होंने तय समय से करीब दो साल पहले ही पद छोड़ दिया। गौरतलब है कि जुलाई 2024 के उग्र प्रदर्शनों और शेख हसीना सरकार के पतन के बाद, शहाबुद्दीन देश के इकलौते ऐसे शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारी थे जो अपने पद पर बने हुए थे।
इस्तीफे की वजह पर रहस्य गहराया
बांग्लादेशी अखबार ‘द डेली स्टार’ से बातचीत में शहाबुद्दीन ने अपने इस्तीफे का कारण खराब स्वास्थ्य को बताया। उन्होंने कहा, “मैंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है। मैं कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा हूं और फिलहाल इस पर इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता।”
हालांकि, अंदरूनी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स में इस इस्तीफे को राजनीतिक दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है:
- पूर्व पीएम शेख हसीना से फोन कॉल: रिपोर्ट्स के अनुसार, मई में इलाज के लिए लंदन दौरे के दौरान राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने भारत में मौजूद पूर्व पीएम शेख हसीना से फोन पर बात की थी। खुफिया एजेंसियों द्वारा इस बातचीत की जानकारी मिलने के बाद शहाबुद्दीन पर इस्तीफा देने का सीधा दबाव बनाया गया।
- संवैधानिक संकट का आरोप: हाल ही में बांग्लादेशी अखबार ‘कालेर कंथो’ को दिए एक साक्षात्कार में शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया था कि प्रो. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान उन्हें किसी अहम चर्चा में शामिल नहीं किया गया और उन्हें पद से हटाने के लिए तरह-तरह की साजिशें रची गईं।
- राजनीतिक जटिलताएं: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि मामला सिर्फ एक फोन कॉल का नहीं है, बल्कि देश की राजनीतिक स्थिति बेहद जटिल हो चुकी है।
बीएनपी की कार्रवाई और गहराता संकट
जुलाई 2024 के छात्र आंदोलनों के बाद से ही राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के पद पर बने रहने को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार अवामी लीग से जुड़े नेताओं और पूर्व अधिकारियों पर शिकंजा कस रही है। शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश में नए संवैधानिक संकट और राजनीतिक भावी दिशा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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