नई दिल्ली, 2 नवम्बर: दिल्ली अतिथि अध्यापक मंच की ओर से ग़ालिब ऑडिटोरियम में रविवार को “समस्याएं और समाधान” विषय पर एक भव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। राजधानी के विभिन्न विद्यालयों से आए बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षकों ने इसमें भाग लेकर अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।
कार्यक्रम का उद्देश्य अतिथि अध्यापकों की समस्याओं को उजागर करना और उनके समाधान के लिए ठोस पहल की दिशा तय करना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, पूर्व IRS अधिकारी कमल किशोर कठेरिया ने कहा कि शिक्षक समाज की आत्मा हैं और दिल्ली के अतिथि अध्यापक सीमित संसाधनों में भी पूरी निष्ठा से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “अब समय है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेकर उनके भविष्य को स्थिर बनाए, जिससे न केवल शिक्षकों बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था को लाभ होगा।”

विशिष्ट अतिथि डॉ. रविन्द्र कुमार, सदस्य (अकादमिक काउंसिल, दिल्ली विश्वविद्यालय), ने अतिथि शिक्षकों को दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था के असली योद्धा बताया। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों को औपचारिक मान्यता और उनके योगदान का सम्मान मिलना चाहिए।
नूरुल्लाह ख़ाँ ने अपने वक्तव्य में कहा कि अतिथि अध्यापकों की लड़ाई केवल वेतन की नहीं, बल्कि पहचान की भी है। वहीं ख़ालिद सुहैल ने कहा कि मंच को शिकायत नहीं, बल्कि समाधान का माध्यम बनाना चाहिए और शिक्षकों को तर्कसंगत रूप से एकजुट होकर अपनी बात रखनी होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राहुल यादव ने की। उन्होंने कहा कि समाजवादी सोच सदैव शिक्षक वर्ग के साथ रही है, और अब समय है कि अतिथि अध्यापकों को स्थायित्व और सम्मान दिया जाए।
कार्यक्रम संचालन राहुल मलिक और नूरजहां ने किया। संचालन के दौरान उन्होंने शिक्षकों से संवाद कर कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. मामून अब्दुलअज़ीज़ ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अतिथि अध्यापकों की समस्याएं तभी सुलझेंगी जब वे एक आवाज़ में अपनी बात रखेंगे।
गोष्ठी के अंत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि अतिथि शिक्षकों की सेवा स्थायित्व, “समान कार्य के लिए समान वेतन” और सम्मानजनक कार्य-परिवेश सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेगा।
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