आईएमपीसीएल के निजीकरण पर ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस ने जताई चिंता

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नई दिल्ली, 19 जून 2026: ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. डी.आर. सिंह ने केंद्र सरकार की औषधि निर्माण कंपनी ‘इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (IMPCL) के निजीकरण पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा कि वर्ष 1978 में स्थापित आईएमपीसीएल, आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति की दवाओं के निर्माण का एक आदर्श संस्थान रहा है। यह संस्था गुणवत्तापूर्ण संयुक्त (कम्पाउंड) औषधियों के निर्माण तथा अनुसंधान कार्यों के लिए विश्वसनीय दवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण संस्थान का निजीकरण किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

आयुष मंत्रालय के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आईएमपीसीएल को सशक्त बनाए सरकार

डॉ. डी.आर. सिंह ने बताया कि ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस पहले भी आईएमपीसीएल को अधिक सक्रिय बनाने तथा आवश्यकतानुसार आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा से जुड़े कर्मचारियों की नियुक्ति करने की मांग उठा चुकी है। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि जनता के हित में इन मांगों को स्वीकार करने के बजाय, इस महत्वपूर्ण औषधि निर्माण संस्थान के निजीकरण का कदम उठा लिया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब आईएमपीसीएल लगातार लाभ कमाने वाली (लाभकारी) संस्था रही है, तो फिर इसका निजीकरण क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही भारत सरकार ने आयुष मंत्रालय की स्थापना की है, लेकिन उसी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इतने महत्वपूर्ण संस्थान को कमजोर करना समझ से परे है।

डॉ. सिंह ने केंद्र सरकार से अपने इस निर्णय की समीक्षा करने और आईएमपीसीएल को और अधिक सशक्त एवं विकसित बनाने का आग्रह किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस उद्देश्य से आयुष मंत्रालय की स्थापना की गई है, उसे सफल बनाने के लिए सरकार आईएमपीसीएल जैसे महत्वपूर्ण औषधि निर्माण संस्थानों को बेचने के बजाय और अधिक प्रोत्साहन तथा मजबूती प्रदान करेगी।

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