‘भारत में सत्ता बुलेट से नहीं बैलेट से तय होती है’: गार्गी कॉलेज में मुख्तार अब्बास नकवी का बड़ा बयान

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नई दिल्ली | 11 फरवरी 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में आज उस वक्त बौद्धिक गर्जना सुनाई दी, जब पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने लोकसभा सचिवालय के एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित किया। नकवी ने न केवल भारतीय लोकतंत्र की श्रेष्ठता सिद्ध की, बल्कि समान नागरिक संहिता (UCC) को ‘अमृत काल का अमृत’ बताकर भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय कर दी।

“बुलेट पर बैलेट की जीत”: भारतीय लोकतंत्र का दम

नकवी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि भारत की सत्ता गलियों की हिंसा से नहीं, बल्कि लोकतंत्र की पवित्र मशीन (ईवीएम) से निकलती है। उन्होंने कहा, “भारत ने संविधान की ‘सामन्ती लिंचिंग’ करने वाली ताकतों को धूल चटाकर दुनिया को दिखाया है कि लोकतंत्र का असली ‘ग्राउंड जीरो हीरो’ कौन है।” समान नागरिक संहिता: “एक मुल्क, एक कानून” समान नागरिक संहिता (UCC) पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए नकवी ने इसे “मदर ऑफ ऑल रिफॉर्म्स” करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया:

  • सांप्रदायिक प्रहार बनाम सुधार: UCC किसी मजहब के खिलाफ नहीं, बल्कि हर नागरिक के हक में है।
  • भरोसे का शटर: उन्होंने आह्वान किया कि ‘भय और भ्रम के गटर’ पर अब ‘भरोसे का शटर’ लगाने का समय आ गया है।

पंथनिरपेक्षता: बहुसंख्यकों के संस्कार का उपहार

नकवी ने एक ऐतिहासिक सत्य को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत में ‘सेक्युलरिज्म’ महज एक शब्द नहीं, बल्कि यहाँ के बहुसंख्यक समाज की सोंच है। उन्होंने पाकिस्तान से तुलना करते हुए कहा कि जहाँ पड़ोसी मुल्क ने कट्टरता चुनी, वहीं हिंदुस्तान के बहुसंख्यकों ने ‘अनेकता में एकता’ को गले लगाया।

“संविधान को हाथ में लेकर समाज में ‘काल्पनिक कन्फ्यूजन’ का भौकाल खड़ा करने वाले सामन्ती सुल्तानों से युवाओं को सावधान रहना होगा।” > — मुख्तार अब्बास नकवी (गार्गी कॉलेज, नई दिल्ली)

युवाओं को संदेश: समावेशी सशक्तिकरण ही प्राथमिकता

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का भारत ‘छद्म सेक्युलरिज्म की सियासी अफीम’ से मुक्त हो रहा है। साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की जगह अब समावेशी सशक्तिकरण ने ले ली है, जो ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को सिद्ध कर रहा है।

गरिमापूर्ण उपस्थिति: इस बौद्धिक मंथन के दौरान मंच पर ICPS की डायरेक्टर डॉ. सीमा कौल, गार्गी कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. वंदना लूथरा, और अन्य विशेषज्ञ भी मौजूद रहे, जिन्होंने संसदीय मूल्यों पर अपने विचार साझा किए।

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