वडीनार (गुजरात), 1 अप्रैल 2026: पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकाबंदी जारी रहने के बीच भारत को मई 2019 के बाद पहली बार ईरानी कच्चे तेल की खेप मिलने वाली है। कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म केप्लर के पोत ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, एस्वातिनी ध्वज वाला टैंकर ‘पिंग शुन’ गुजरात के वडीनार बंदरगाह को गंतव्य बता रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह तेहरान से भारत के लिए तेल की पहली खेप हो सकती है।
टैंकर में करीब 6 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल लोड होने का अनुमान है, जो 4 मार्च को ईरान के मुख्य तेल संयंत्र खारग द्वीप से लादा गया था। यह खेप 4 अप्रैल को वडीनार पहुंचने की उम्मीद है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस तेल का उपयोग कौन सी भारतीय रिफाइनरी करेगी।
यह घटनाक्रम तब घटी जब अमेरिका ने 21 मार्च को पश्चिम एशिया युद्ध के बीच ईरानी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों को 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया। वाशिंगटन का यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास है, जो 19 अप्रैल को समाप्त होगा।
भारत ऐतिहासिक रूप से ईरान का बड़ा खरीदार रहा है। 2018 में भारत ने प्रतिदिन औसतन 5.18 लाख बैरल ईरानी तेल आयात किया, जो मई 2019 तक घटकर 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। उसके बाद अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आयात पूरी तरह बंद हो गया था।
ट्रम्प का बयान: इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की जिम्मेदारी उन देशों पर डाल दी, जो इससे निर्भर हैं। उन्होंने कहा, “अमेरिका के लिए ऐसा करने का कोई कारण नहीं।” ट्रम्प ने सहयोगी देशों से निराशा जताते हुए कहा कि वे अमेरिकी युद्ध प्रयासों में और योगदान दें, वरना “अपना तेल खुद निकाल लो।”
ईरानी तेल की यह खेप वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजरें टिकाए हुए है, खासकर होर्मुज नाकाबंदी के बीच।
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