रामपुर (उत्तर प्रदेश): समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद आज़म खान ने दिवाली के मौके पर ऐसा बयान दे दिया है, जिसने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा, “जो लोग दीये जलाते हैं, वो कुछ भी जला सकते हैं।”
आज़म खान का पूरा बयान
एक निजी चैनल से बातचीत में आज़म खान ने कहा, “दिवाली के इस पर्व पर जिसमें दीये जलते नहीं हैं, दीये रोशन होते हैं। वो लोग जो दीये जलाते हैं, वो कुछ भी जला सकते हैं। लेकिन जो लोग दीये रोशन करते हैं, उनका मकसद सिर्फ उजाला देना होता है, ठंडक देना होता है, नफरतों के अंधेरे को मिटाना होता है।”
उन्होंने आगे कहा, “वही लोग मेरे लिए काबिल-ए-कद्र हैं और मैं उनकी सराहना करता हूं, उनसे मोहब्बत करता हूं। I love them.” साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों और सभी चाहने वालों को भी दिल से धन्यवाद कहा, जिन्होंने उनके प्रति अपनाया हुआ प्यार और समर्थन जारी रखा है। उन्होंने कहा कि यह प्यार उनकी ताकत है और वे हमेशा अपने लोगों के लिए काम करते रहेंगे।
उन्होंने अपने बयान के दौरान कहा कि दिवाली का पर्व न केवल रोशनी बल्कि प्रेम, भाईचारे और शांति का संदेश भी है, और इसी भावना के साथ त्योहार मनाना चाहिए। उनका संदेश था कि हमें नफरतों को मिटाकर समाज में मेलजोल बढ़ाना चाहिए।
विवाद का पक्ष और प्रतिक्रिया
यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और इसे लेकर अब सियासी बहस जारी है। हालाँकि, आज़म खान के बयान में ऐसा कोई पक्ष नहीं है जिससे विवाद की शुरुआत हो। उनका बयान दीयों को रोशन करना एक सकारात्मक दृष्टिकोण दर्शाता है, जबकि दीये जलाना एक अलग सोच का प्रतीक है। आज़म खान ने दीयों को केवल जलाने की बजाय रोशन करने का महत्व बताया, जिससे सामाजिक मेलजोल और शांति का संदेश मिलता है। इस संदर्भ में उनका बयान सभी के लिए प्रेम और भाईचारे का संदेश है, न कि विवाद का कारण।
अखिलेश यादव के बयान के बाद शुरू हुआ विवाद
इससे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अयोध्या दीपोत्सव को लेकर टिप्पणी की थी कि “क्रिसमस के दौरान दुनिया के शहर जगमगा उठते हैं, लेकिन वहां यह सिलसिला महीनों चलता है। हमें उनसे सीखना चाहिए। आखिर हमें दीयों और मोमबत्तियों पर बार-बार इतना खर्च क्यों करना।”
अखिलेश के इस बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने उन पर निशाना साधा था। इसी बीच अब आज़म खान के दीया वाले बयान ने विवाद को और हवा दे दी है।
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