रामपुर एक अज़ीम इलमी और सामाजिक हस्ती से महरूम हो गया।
रामपुर – 27 अगस्त 2025: रामपुर के मुफ्ती-ए-शहर मौलाना मेहबूब साहब का आज अमेरिका में इंतकाल हो गया है। इस खबर से पूरे शहर में ग़म का माहौल है। लोग उनकी दीनी व तालीमी सेवाओं को याद कर रहे हैं।
आज सुबह अमेरिका के डेलास शहर से डॉ. ज़फ़र अली अंजुम वजीही ने फ़ोन पर शहर मुफ्ती हज़रत मौलाना महबूब अली साहब क़ादरी वजीही के इंतेकाल की खबर दी।
मुफ्ती साहब का जन्म और प्रारम्भिक शिक्षा
मुफ्ती साहब का जन्म जून 1930 में मोहल्ला अंगूरी बाग में हाफ़िज़ अमजद अली साहब के घर हुआ था। उन्होंने मदरसा अनवारुल उलूम में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और कुराने करीम हिफ़्ज़ किया। 1948 से 1954 तक खतीब-ए-आजम मौलाना शाह वजीहुद्दीन अहमद खान कादरी मुजद्दी के मार्गदर्शन में अरबी की शिक्षा पूरी की।
1954 में ही मदरसा जामे उल उलूम फ़ुरकानिया में शिक्षक बने और तरक्की करते हुए प्रिंसिपल के पद तक पहुंचे। 1998 में मदरसा बोर्ड की नौकरी से सेवानिवृत्त हुए लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षण सेवाएं देते रहे।
खतीब-ए-आजम ने जामा मस्जिद का इमाम नियुक्त किया
1959 में खतीब-ए-आजम ने उन्हें जामा मस्जिद का इमाम नियुक्त किया और 1960 में मुफ्तीए शहर और मुफ्ती फ़ुरकानिया कें पदों पर नियुक्त किया। पैंसठ साल तक लगातार शिक्षण और फतवा जारी करने की सेवाएं देते रहे। इल्म-ए-हदीस की मशहूर किताब मिश्कात शरीफ की उर्दू व्याख्या आठ खंडों में लिखी जो मदरसा फ़ुरकानिया से छपी है।
मुफती साहब मरहूम के शिष्यों की संख्या सैकड़ों तक पहुंचती है जो भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हुए हैं |
मरहूम मुफ्ती साहब ने रामपुर के मसलके एतेदाल को हमेशा तरजीह दी और मज़हबी शिद्दत पसंदो को हमेशा राहे एतेदाल (दरमियाना रास्ता) पर चलने की तलकीन फरमाई।
रामपुर के मदरसा जामें उल उलूम फुरकानिया और खानकाहे अहमदिया कादरिया की इंतेज़ामी कमेटियों के वो ता हयात सदर और मुतवल्ली रहे। जामा मस्जिद की खिताबत के फराईज़ भी माज़ी करीब तक अंजाम देते रहे।
अमेरिका में हुआ दिमागी सदमा (Brain Stroke)
गुज़िश्ता 5 अगस्त को मरहूम ने रामपुर से अमेरिका का सफर इख्तियार किया, वहां पर वो अपने पोते हाफिज़ व कारी सबीह अंजुम की शादी की तकरीब में शरीक हुए लेकिन चंद रोज़ के बाद ही उन्हें दिमागी सदमा (Brain Stroke) हुआ। फौरी ऑपरेशन किया गया लेकिन होश नहीं आ सका और उनका चन्द रोज़ के बाद इन्तेकाल होगया।
जुमा की सुबह तक उनकी मैयत रामपुर पहुँचने का इम्कान है। उसके बाद ही नमाज़े जनाज़ा और तदफीन का इंतेज़ाम होगा।
परिजनों में, पत्नी के अलावा तीन बेटे हैं: (1) मसूद अली साहब (2) डॉक्टर जफर अली अंजुम उर्फ सऊद साहब (3) मुंशी फैज अली इरफान साहब, इनके अलावा, तीन बेटियां भी यादगार हैं।
बुधवार को शहर भर में कुरान ख्वानी का सिलसिला जारी रहा। दोपहर बारह बजे मदरसा फुरकानिया में सैकड़ों छात्रों और शिक्षकों ने कुरान ख्वानी फरमाई ‘कुल शरीफ’ होवा और शहर इमाम मौलवी मोहम्मद नासिर खान साहब ने मरहूम की मग़फिरत दुआ फरमाई।
- जौहर यूनिवर्सिटी केस: रिकॉर्ड की सत्यापित प्रतियां देने के निर्देश, 38 भवनों के ध्वस्तीकरण मामले में सुनवाई

- उत्तर प्रदेश में बड़ा पुलिस फेरबदल: 18 IPS अधिकारियों के तबादले, ATS से लेकर SSF तक बदली जिम्मेदारियां

- यूपी में 34 आईएएस अधिकारियों का तबादला, 14 जिलाधिकारियों का भी फेरबदल

- गौशालाओं में क्रूरता और लापरवाही की शिकायत पर बड़ा एक्शन: बरेली मण्डल में उच्चस्तरीय जाँच के आदेश

- देवरिया: 65 वर्षीय मोहन प्रसाद की मौत के बाद दफनाने पर मचा विवाद, पुलिस की मौजूदगी में पूरी हुई अंतिम प्रक्रिया

- “यह यात्रा का अंत नहीं है” : जानिए क्यों खास रही IAS आंजनेय कुमार सिंह की 11 साल की यूपी पारी

- जौहर यूनिवर्सिटी पर नहीं चलेगा बुलडोजर: कमिश्नर के ऐतिहासिक फैसले के मुरीद हुए लोग, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (RSS) ने जताया आभार

- जेवर एयरपोर्ट का ऐतिहासिक आगाज़: 172 किसानों ने भरी पहली उड़ान, अब लखनऊ में करेंगे मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात

- UP Electricity Rate Hike: यूपी में बिजली का तगड़ा झटका! जून से 10% तक महंगा होगा बिल, जानें क्या है वजह

- यूपी: हमीरपुर में भीषण तूफान का कहर, निर्माणाधीन पुल ढहने से 6 मजदूरों की मौत, रेस्क्यू जारी

- प्रयागराज: सीवर खुदाई में मिट्टी ढहने से 45 वर्षीय मजदूर की मौत, कई घंटे बाद शव बरामद

- नोएडा में हिंसक प्रदर्शन के बाद यूपी सरकार का फैसला, गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में बढ़ी न्यूनतम मजदूरी

